राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 20 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में आईएएस टिना दाबी को प्रथम जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार और ₹2 करोड़ की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित किया। यह पुरस्कार बाड़मेर जिला के जल संरक्षण के अद्वितीय प्रयासों के लिए दिया गया, जहाँ टिना दाबी के नेतृत्व में एक ऐसा जल संचय प्रणाली विकसित की गई, जिसने थार रेगिस्तान के इस जिले को भारत का जल संरक्षण का सबसे उदाहरण बना दिया। यह उपलब्धि उनके निजी दर्द के आधार पर शुरू हुई — 2022 में जब 64 महिलाएँ जल की कमी से तंकों में कूदकर आत्महत्या कर गईं।
तंका मॉडल: एक आत्महत्या से जन्मा बदलाव
टिना दाबी ने उस त्रासदी के बाद कुछ ऐसा किया, जिसने न सिर्फ बाड़मेर को बचाया, बल्कि पूरे देश के लिए एक नया मानक बना दिया। उन्होंने पारंपरिक तंकों को नवीन बनाया — छतों से बरसात के पानी को एकत्रित करने के लिए हर नए ग्रामीण घर में तंका कनेक्शन अनिवार्य कर दिया। इसके अलावा, तंकों को लॉक किया गया, हाथ से चलने वाले पंप के साथ जोड़ा गया, और वायु प्रदूषण और जीवाणुओं से बचाव के लिए विशेष कवर लगाए गए। इससे पानी 3-4 महीने तक पीने योग्य बना रहता है।
दिसंबर 2024 तक, बाड़मेर में 87,000 से अधिक तंके बन चुके थे। इनमें से 98% ग्रामीण घरों में लगे हुए थे। यह न केवल जल उपलब्धता बढ़ा रहा है, बल्कि महिलाओं के लिए पानी लेने का खतरनाक सफर भी समाप्त हो रहा है। अब वे दूर के कुएँ या नहरों तक नहीं जातीं — घर के बाहर एक तंका है, और उसमें पानी है।
राजस्थान का जल संरक्षण बदलाव
बाड़मेर की उपलब्धि राजस्थान के जल संरक्षण अभियान का एक छोटा हिस्सा है। राज्य भर में 43,204 जल संरक्षण कार्य शुरू किए गए, जिनमें से जयपुर अकेले में 12,000 से अधिक थे। राज्य सरकार ने पारंपरिक जल संरचनाओं — तालाब, बावड़ियाँ, नहरें — को भी बहाल किया। इसके बाद राजस्थान के जिलों में से बाड़मेर को पहला स्थान दिया गया, जबकि उदयपुर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
उदयपुर के लिए पुरस्कार रिया दाबी, टिना की छोटी बहन, ने स्वीकार किया, क्योंकि उदयपुर के जिला कलेक्टर नमित मेहता बीमार थे। रिया ने ₹1 करोड़ का पुरस्कार स्वीकार किया। यह दो बहनों का ऐतिहासिक क्षण था — एक ही परिवार से दो जिलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार।
राष्ट्रीय प्रभाव और अन्य पुरस्कार
मंत्रालय ने जल शक्ति अभियान के तहत कुल 100 पुरस्कार दिए, जिनमें तीन राज्यों, 67 जिलों, छह नगर निगमों और कई व्यक्तिगत श्रेणियाँ शामिल थीं। एक अन्य पुरस्कार बजरंग लाल जेटू, जयतुबास (सीकर) के एक किसान को दिया गया, जिन्होंने अपने गाँव में जल संचय के लिए निजी रूप से 200 तालाब बनाए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने टिना दाबी के तंका मॉडल को विशेष रूप से प्रशंसा की, जिसमें रेत से पानी निकालने की तकनीक भी शामिल है। यह तकनीक अभी तक अनुसंधान स्तर पर थी, लेकिन बाड़मेर में इसका व्यावहारिक अनुप्रयोग साबित हो गया।
एक आदर्श जो देश बदल सकता है
“यह केवल एक जिले की कहानी नहीं है,” कहते हैं जल शक्ति मंत्रालय के एक अधिकारी। “यह देश के 300 से अधिक अर्ध-शुष्क और रेगिस्तानी जिलों के लिए एक नक्शा है।”
हर वर्ष लगभग 1.5 करोड़ लोग जल संकट के कारण गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। बाड़मेर का मॉडल इस संकट को बहुत सस्ते और स्थानीय स्रोतों से हल करता है। इसकी लागत एक तंके के लिए लगभग ₹15,000 है — जो एक नल की लागत का एक-चौथाई है।
अब इस मॉडल को गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी अपनाने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसे पूरे देश में लागू किया जाए, तो भारत में जल संकट के कारण होने वाली मृत्युदर 40% तक कम हो सकती है।
टिना दाबी: एक अधिकारी, एक नागरिक
टिना दाबी ने 2015 में यूपीएससी की परीक्षा में एलआईए रैंक 1 हासिल की। उनका निजी जीवन भी अक्सर खबरों में रहा — 2018 में रैंक 2 वाले अथार आमिर खान से शादी, 2021 में तलाक, और 2022 में अपने ही कैडर के आईएएस डॉ. प्रदीप गवांडे से दूसरी शादी। लेकिन आज उनकी पहचान केवल इन घटनाओं से नहीं है। वे एक ऐसी अधिकारी हैं जिन्होंने अपने दर्द को एक जन आंदोलन में बदल दिया।
उनका एक कथन अब राष्ट्रीय नारा बन गया है: “हमने न केवल पानी बचाया, बल्कि महिलाओं की आत्मा भी बचाई।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तंका मॉडल क्या है और यह कैसे काम करता है?
तंका मॉडल छतों से बरसात के पानी को भूमि के नीचे भंडारित करने की एक पारंपरिक-आधुनिक मिश्रण तकनीक है। इसमें घरों की छत से नालियों के जरिए पानी को एक बड़े टैंक में डाला जाता है, जिसे लॉक किया जाता है और हाथ पंप से पानी निकाला जाता है। यह तकनीक पानी को वायु, धूल और जीवाणुओं से बचाती है, जिससे यह 3-4 महीने तक पीने योग्य रहता है।
बाड़मेर में यह प्रणाली क्यों सफल हुई?
इसकी सफलता का कारण स्थानीय सहभागिता थी। गाँवों में सभी नए घरों में तंका लगाना अनिवार्य कर दिया गया। साथ ही, स्थानीय महिलाओं को डिजाइन में शामिल किया गया — उन्होंने बताया कि क्या उन्हें चाहिए। इससे लोगों को यह महसूस हुआ कि यह उनकी अपनी चीज है।
इस पुरस्कार के बाद अगला कदम क्या है?
जल शक्ति मंत्रालय अब इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना बना रहा है। गुजरात और मध्य प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। एक नई योजना भी तैयार की जा रही है, जिसमें ग्राम पंचायतों को तंका बनाने के लिए सीधे धन दिया जाएगा।
क्या यह देश के अन्य रेगिस्तानी इलाकों के लिए उपयोगी है?
बिल्कुल। राजस्थान के अलावा, गुजरात के कच्छ, महाराष्ट्र के बीड और छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसे क्षेत्रों में भी जल संकट बहुत गंभीर है। यहाँ भी तंका मॉडल को अपनाया जा सकता है — यह बहुत सस्ता है, स्थानीय सामग्री से बनाया जा सकता है, और इसे कोई बड़ी तकनीकी जानकारी की जरूरत नहीं है।
टिना दाबी के बाद अन्य आईएएस अधिकारी क्या कर रहे हैं?
अब देश भर में आईएएस अधिकारी अपने जिलों में तंका मॉडल को अपना रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक अधिकारी ने अपने जिले में 15,000 तंके बनाने का लक्ष्य रखा है। यह एक नई प्रवृत्ति बन रही है — अधिकारी अब केवल आदेश देने के बजाय समाधान बनाने लगे हैं।
क्या इसके लिए सरकारी बजट बढ़ाया गया है?
हाँ। जल शक्ति मंत्रालय ने 2025-26 के बजट में जल संरक्षण के लिए ₹12,000 करोड़ की राशि आवंटित की है, जिसमें से ₹3,500 करोड़ तंका और रेनवाटर हार्वेस्टिंग पर खर्च किए जाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य अगले 5 वर्षों में 10 लाख तंके बनाना है।