जब आर. अष्टोक, कर्नाटक विधानसभा में विपक्षी नेता ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 12 अक्टूबर को एक डिनर बैठक बुलाई है, तो राजनीतिक माहौल गहरा चौंक गया। अष्टोक के अनुसार, इस बैठक में राज्य के संसाधनों को बीहार विधानसभा चुनावों के लिए फंडिंग करने की योजना है, जिससे कर्नाटक "कांग्रेस का एटीएम" बन रहा है। यह आरोप 11 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे बढ़े, जहाँ उन्होंने कई विशिष्ट तथ्यों और धनराशि के आंकड़ों का हवाला दिया।
पृष्ठभूमि: कर्नाटक में सत्ता संघर्ष
भारी चेतावनी देने से पहले, अष्टोक ने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस के प्रमुख साहब, सिद्दारमैया, पिछले कई महीनों से कई प्रकरणों में फंसे हुए हैं। उनका दावा है कि 5 गारंटी योजनाओं – गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति – ने इस साल के बजट पर लगभग ₹51,034 करोड़ का बोझ डाला है। इस खर्चे को लेकर भीतर ही भीतर असंतोष व्याप्त है, और विरोधी दल इसे अपने लाभ के लिए उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं।
विवादित डिनर बैठक का रहस्य
अष्टोक ने बताया कि 12 अक्टूबर को आयोजित होने वाली डिनर बैठक सिर्फ राजनैतिक चर्चा नहीं होगी; यह "धन संग्रह" का मंच बनेगा। वह दावा करते हैं कि कांग्रेस के विधायी सदस्यों को इस बैठक में यह तय करना होगा कि वे बीहार चुनावों में कितना योगदान देंगे। इस संदर्भ में उन्होंने कांग्रेस के विधायक के.सी. वीरेन्द्र के बारे में कई गंभीर आरोप लगाए।
वीरेन्द्र, जो हाल ही में एक अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में प्रवर्तन प्राधिकरण (ED) द्वारा गिरफ्तार हुए थे, पर 40 किलोग्राम सोना—लगभग ₹50 करोड़ मूल्य का—बीहार में ले जाने का आरोप है। अष्टोक ने कहा, "मेरे पास है जानकारी कि उन्होंने कांग्रेस की बीहार चुनावी खर्चे की पूरी जिम्मेदारी ले ली है।" उन्होंने यह भी बताया कि इस सोने के अलावा, वीरेन्द्र ने पार्टी को 300 करोड़ रुपये तक का योगदान देने का वादा किया था, शर्त यह थी कि उन्हें मंत्री पद दिया जाए।
जेडीएस का समर्थन और अन्य विपक्षी प्रतिक्रियाएँ
ज्यादा देर नहीं हुई, जडावादी निर्याणस्वामी (जॉन्स पार्टी) ने भी अष्टोक के दावों को समर्थन देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में विशिष्ट जानकारी मिली है। उनका कहना था कि "ED ने इस मामले में लगभग ₹400 करोड़ की संपत्ति जब्त की है।" निर्याणस्वामी ने यह भी कहा कि अगर सिद्दारमैया नवंबर में ही अपने पद से हट जाते हैं, तो यह "राजनीतिक क्रांति" का संकेत होगा।
केंद्रीय मंत्री तथा कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इन आरोपों को निराधार कहा। उन्होंने कहा, "यदि वह मुख्यमंत्री बनते हैं तो गारंटी योजनाओं को बंद करने का अधिकार उनके पास है।" वहीं, कर्नाटक के जिलाधिकारी मंत्री एन. चळुवरायस्वामी ने डिनर बैठक को राजनीतिक नहीं, बल्कि सामान्य सामाजिक कार्यक्रम बताया और इसे "बकवास" कहा।
कांग्रेस के भीतर आंतरिक असंतोष
कांग्रेस के विधायक आर.वी. देशपांडे ने इसी साल मई में लॉन्च की गई पाँच गारंटी योजनाओं की आलोचना की थी। अष्टोक ने इस टिप्पणी को "सच्चाई" कहा और कहा कि अंततः कई कांग्रेस नेता इन गारंटी योजनाओं के नुकसान को समझेंगे। निर्याणस्वामी ने इस पर जोड़ते हुए कहा, "गारंटी के नाम पर देहात में दिवालियापन हो रहा है।"
कानूनी और सामाजिक पहलू
अष्टोक ने कर्नाटक में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "डसर में एक लड़की को बलून बेचते हुए बदतर अपराध का शिकार बनाया गया, जिससे यह सिद्ध होता है कि राज्य ने सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की।" यह मामला दशहरा महोत्सव के दौरान मयसूर में सामने आया। इस तरह के आरोपों से राज्य सरकार पर सार्वजनिक भरोसा कमज़ोर हो रहा है।
भविष्य की संभावना और राजनीतिक परिदृश्य
अब प्रश्न यह है कि इस विवाद का क्या असर कर्नाटक की आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा। यदि अष्टोक के दावे सच्चे सिद्ध होते हैं, तो कांग्रेस को अपने भीतर गहरी छानबीन करनी पड़ेगी और संभवतः मंत्री पद पर पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा। दूसरी ओर, बीहार चुनावों में कांग्रेस के वित्तीय दबाव को कम करने के लिए यह रणनीति दिखती है कि वह बाहर के संसाधनों पर निर्भर हो रही है।
विदेशी मीडिया ने भी इस खबर को उजागर किया है, विशेष रूप से यह कि भारतीय राजनैतिक पार्टियों के बीच वित्तीय लहरें कैसे राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव परिणामों को प्रभावित करती हैं। इस बीच, सामाजिक मीडिया पर भी इस मामले पर तीखी बहस चल रही है, जहां उपयोगकर्ता "कांग्रेस एटीएम" शब्द को लेकर मीम्स और तेज़ी से शेयर कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कर्नाटक वास्तव में कांग्रेस का बीहार चुनावों का एटीएम बन रहा है?
अष्टोक के आरोपों के अनुसार, कुछ कांग्रेस नेता वित्तीय सहयोग के बदले मंत्री पद की आशा रखते हैं, और इस प्रक्रिया में सोने सहित बड़ी रकम का प्रयोग हो रहा है। अभी तक कोई न्यायिक जांच नहीं हुई है, परन्तु यह मुद्दा राजनीतिक तौर पर गंभीर बहस का कारण बन गया है।
क्या के.सी. वीरेन्द्र के खिलाफ सोने की तस्करी को साबित किया गया है?
ED ने उनके घर में 40 किग्रा सोना बरामद किया था, जिसकी कीमत लगभग ₹50 करोड़ है। लेकिन इसे अंततः चुनावी फंडिंग से जोड़ने के लिए अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है।
किसी ने बताया कि सिद्दारमैया को नवंबर में हटाया जा सकता है?
अष्टोक ने यह भविष्यवाणी की है कि पार्टी के अंदर की उथल-पुथल और धारा‑सेनापति संघर्ष के कारण सिद्दारमैया का पद छूट सकता है। यह अनुमान अभी तक राय तक सीमित है और इसका कोई आधिकारिक समर्थन नहीं है।
कन्वर्ज़न के दौरान कौन-सी गारंटी योजनाएं सबसे अधिक विवादित हैं?
गृह ज्योति, गृह लक्ष्मी, अन्न भाग्य, युवा निधि और शक्ति योजनाओं को मिलाकर इस वित्तीय वर्ष में लगभग ₹51,034 करोड़ खर्च हुए हैं। विरोधी दल इन योजनाओं को "कट्टर खर्च" करार कर जनता को आर्थिक बोझ समझते हैं।
क्या इस विवाद से भारत के राष्ट्रीय चुनावों पर कोई असर पड़ेगा?
यदि जांच से पता चलता है कि कांग्रेस ने अपने राज्य संसाधनों का दुरुपयोग किया है, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर इमरजेंसी को बढ़ा सकता है, विशेषकर आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।